रात की चादर में अनगिनत तारे हैं,
कुछ चमकते हैं कुछ गर्दिश के मारे हैं,
सुबह की आहट में एक एक खो जाते हैं,
स्याह फिजा में साथ निभाने फिर आ जाते हैं।
कुछ चमकते हैं कुछ गर्दिश के मारे हैं,
सुबह की आहट में एक एक खो जाते हैं,
स्याह फिजा में साथ निभाने फिर आ जाते हैं।