आज कौन सी तस्वीर पर मैं हूँ,
आज कौन सी निगाहों में मैं हूँ,
मेला खत्म हो गया जाने कब से,
जाने कौन से ख़यालोँ मेँ मैं हूँ..
आँखें हैं इंतज़ार में किसकी,
क्यों हर आते जाते को पूछता मैं हूँ,
आवाज़ ख़ामोश है पर मेरा दिल नहीं,
धड़कन किसकी लगातार सुनता मैं हूँ..
गली मेरी सुनी नहीं है लेकिन,
इन लोगों से अनजान हूँ मैं,
तरस गया हूँ बात करने के लिए,
क्योंकि इन्हीं लफ्ज़ोँ से अनजान हूँ मैं..
दुआएं काफी दे रखी हैं सबको,
खुद ही अब मेहर का तलबगार हूँ मैँ,
झुकनी है नज़रें तेरे ही दर पे,
और तेरे ही इनायत से अनजान मैं हूँ..
हर दिल में तेरा ही तो ठिकाना है,
और मैं नादान हर कदम बेघर हूँ,
तेरी ही ईबादत करता रहूँगा अगर,
मोहब्बत और खुदा के दर पे मैं हूँ..
Wednesday, June 24, 2009
Saturday, June 6, 2009
ज़िन्दगी सवाल करती है..
जिंदगी सवाल करती है..
कहाँ के हालात बताऊँ, कहाँ की कहानी सुनाऊँ,
किसकी खिलाफत करूँ, किसकी करूँ वकालत,
मेरी जिंदगी, तेरी जिंदगी, एक नही-एक नही.
सब्र जवाब दे जाता है..
कैसे हालात पनपते हैं, कैसे वक़्त ज़ख्म देता है,
आशिक रोया करते हैं, आंसुओं में जहां होता है,
कोई हँसता है कभी, तोह दिल से गिला करता हूँ.
उसकी आँखें पूछती हैं..
मैं कैसे दूर रहता हूँ, मैं क्यूँ दूर रहता हूँ,
हवा के साए से कहकर, तुफानो का पता पूछता हूँ,
सुनी सी उसकी आँखें मुझसे सवाल कई करती हैं.
माजरा क्या है..
हर कोई सुखा है, मैं भीगा हुआ क्यूँ हूँ,
अश्क सब के आँखों में हैं तू नहीं अकेला है,
मेरी गुडिया टूट गयी थी, ख़त्म हुआ आज मेला है.
कहाँ के हालात बताऊँ, कहाँ की कहानी सुनाऊँ,
किसकी खिलाफत करूँ, किसकी करूँ वकालत,
मेरी जिंदगी, तेरी जिंदगी, एक नही-एक नही.
सब्र जवाब दे जाता है..
कैसे हालात पनपते हैं, कैसे वक़्त ज़ख्म देता है,
आशिक रोया करते हैं, आंसुओं में जहां होता है,
कोई हँसता है कभी, तोह दिल से गिला करता हूँ.
उसकी आँखें पूछती हैं..
मैं कैसे दूर रहता हूँ, मैं क्यूँ दूर रहता हूँ,
हवा के साए से कहकर, तुफानो का पता पूछता हूँ,
सुनी सी उसकी आँखें मुझसे सवाल कई करती हैं.
माजरा क्या है..
हर कोई सुखा है, मैं भीगा हुआ क्यूँ हूँ,
अश्क सब के आँखों में हैं तू नहीं अकेला है,
मेरी गुडिया टूट गयी थी, ख़त्म हुआ आज मेला है.
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