जिंदगी सवाल करती है..
कहाँ के हालात बताऊँ, कहाँ की कहानी सुनाऊँ,
किसकी खिलाफत करूँ, किसकी करूँ वकालत,
मेरी जिंदगी, तेरी जिंदगी, एक नही-एक नही.
सब्र जवाब दे जाता है..
कैसे हालात पनपते हैं, कैसे वक़्त ज़ख्म देता है,
आशिक रोया करते हैं, आंसुओं में जहां होता है,
कोई हँसता है कभी, तोह दिल से गिला करता हूँ.
उसकी आँखें पूछती हैं..
मैं कैसे दूर रहता हूँ, मैं क्यूँ दूर रहता हूँ,
हवा के साए से कहकर, तुफानो का पता पूछता हूँ,
सुनी सी उसकी आँखें मुझसे सवाल कई करती हैं.
माजरा क्या है..
हर कोई सुखा है, मैं भीगा हुआ क्यूँ हूँ,
अश्क सब के आँखों में हैं तू नहीं अकेला है,
मेरी गुडिया टूट गयी थी, ख़त्म हुआ आज मेला है.
कहाँ के हालात बताऊँ, कहाँ की कहानी सुनाऊँ,
किसकी खिलाफत करूँ, किसकी करूँ वकालत,
मेरी जिंदगी, तेरी जिंदगी, एक नही-एक नही.
सब्र जवाब दे जाता है..
कैसे हालात पनपते हैं, कैसे वक़्त ज़ख्म देता है,
आशिक रोया करते हैं, आंसुओं में जहां होता है,
कोई हँसता है कभी, तोह दिल से गिला करता हूँ.
उसकी आँखें पूछती हैं..
मैं कैसे दूर रहता हूँ, मैं क्यूँ दूर रहता हूँ,
हवा के साए से कहकर, तुफानो का पता पूछता हूँ,
सुनी सी उसकी आँखें मुझसे सवाल कई करती हैं.
माजरा क्या है..
हर कोई सुखा है, मैं भीगा हुआ क्यूँ हूँ,
अश्क सब के आँखों में हैं तू नहीं अकेला है,
मेरी गुडिया टूट गयी थी, ख़त्म हुआ आज मेला है.
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