खुद का तो पता नहीं और दूसरों की खबर रखते हैं,
अपने आप से ज्यादा वो असर रखते हैं..
उन पलोँ का हिसाब कौन देगा ये कभी गौर किया है?
जिन पलोँ में खुद से ज्यादा उनका कदर करते हैं..
एक दिन जो तन्हा हुए तब खुद को परेशाँ पाया,
ऐसा क्यों हुआ जब खुद से रूबरू होने का मौका आया..
दुनिया से तो भाग सकते हो खुद को छिपाकर,
कैसे बचोगे जब ढूँढ लेगा तुझे खुद का साया..