Thursday, April 2, 2015

शाम

लो फिर एक शाम हो गयी मैं अधूरा गया,
तू दूर है मुझसे मैं दूर तुझसे रह गया..

Wednesday, March 25, 2015

उस पुराने चाँद को देखकर..

आज फिर धड़का उस पुराने से चाँद को देखकर,
कुछ सीने में खटका उस बेगाने से यार यार को देखकर..

इक अरसा हो गया है उस से बिछड़े मुझको,
फिर भी ना जाने क्यूँ अच्छा लगता है  मुझको..

Monday, March 23, 2015

शिकायत और उम्मीदें..

खुद को थकाने लगी हैं ये उम्मीदें,
क्या गिला करें किस से शिकायत करें किसे कोसें..
अर्ज़ियाँ मेरे इश्क़ की उनके हाथों में अब भी है,
अब इससे ज़्यादा क्या आरज़ू रखें हम उनसे..
उस खत को एक बार पढ़ तो लें मेरी शिकायत पे गौर करें,
गलतियां करता रहा हूँ उम्रभर पर एक मौका और मेरी नज़र करें..
अबकी बारी लगता है इश्क़ के पत्ते में जान बाकी नहीं,
बहुत साल हो गए इस तरफ की उनसे की बारिश नहीं..
मुसाफिर जज़्बात दौरा कर आये तेरे दिल से मेरे दिल तलक,
कहता है अब यह मुझे की उनका दिल मुझसे मुझसे ज़्यादा अच्छा है..
हमने रख दी है कलम इन कागज़ों के ऊपर ये सोचकर,
हम तो पक्के मुख्तलीफ़ थे इश्क़-ओ-जुनून से..
पर ये कौन है हमारा खुदा जिसने इस ज़माने को बेनूर दिया,
ना-उम्मीद  चला था, तेरे इश्क़ ने मुझे मशहूर कर दिया..