आज फिर धड़का उस पुराने से चाँद को देखकर,
कुछ सीने में खटका उस बेगाने से यार यार को देखकर..
इक अरसा हो गया है उस से बिछड़े मुझको,
फिर भी ना जाने क्यूँ अच्छा लगता है मुझको..
कुछ सीने में खटका उस बेगाने से यार यार को देखकर..
इक अरसा हो गया है उस से बिछड़े मुझको,
फिर भी ना जाने क्यूँ अच्छा लगता है मुझको..
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