जाने इसे क्या कहते हैं..
उसके लिए रोया हूँ मैं, उसके लिए रोया हूँ,
जाने कितने दिनों तक तकलीफे सहा हूँ मैं,
आंसुओं के अनगिनत बूंदों से मिला हूँ.
आरजू दिल की नहीं जान पाया हूँ मैं,
जकड़ा हुआ आज भी उन ही चाँद लफ्जों में हूँ,
सोचता हूँ सोचता हूँ जाने क्या जाने क्यूँ,
तू ही तू है मेरे ज़हन में जाने क्यूँ जाने क्यूँ,
नहीं पूरी होती है जो आरजू सच वही तोह है तू..
अक्सर ही खोजता हूँ तुझको अपने ही अक्स में,
क्यूँ नहीं मिलती है तू मेरे इस ज़हन में,
जाने इसे क्या कहते हैं की दिल रोता है तेरे लिए,
आज भी याद करता है दर्द यह सहते हुए..
उसके लिए रोया हूँ मैं, उसके लिए रोया हूँ,
जाने कितने दिनों तक तकलीफे सहा हूँ मैं,
आंसुओं के अनगिनत बूंदों से मिला हूँ.
आरजू दिल की नहीं जान पाया हूँ मैं,
जकड़ा हुआ आज भी उन ही चाँद लफ्जों में हूँ,
सोचता हूँ सोचता हूँ जाने क्या जाने क्यूँ,
तू ही तू है मेरे ज़हन में जाने क्यूँ जाने क्यूँ,
नहीं पूरी होती है जो आरजू सच वही तोह है तू..
अक्सर ही खोजता हूँ तुझको अपने ही अक्स में,
क्यूँ नहीं मिलती है तू मेरे इस ज़हन में,
जाने इसे क्या कहते हैं की दिल रोता है तेरे लिए,
आज भी याद करता है दर्द यह सहते हुए..
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