दुआएं न दिया करो, अब इन दुआओं से डर लगता है।
वहम के अक्स दिल में हैं, हवाओं से डर लगता है।
वफा की उम्मीद नहीं है अब, कस्मोँ से डर लगता है।
ज़ख्म दिल में हैं मेरे, दवाओं से डर लगता है।
सुबह प्यारी नहीं लगती, रातों से डर लगता है।
हँसी चुभती है सच, अश्कोँ से डर लगता है।
आँखें सुनी है अब तो, नज़ारोँ से डर लगता है।
ये राहेँ किसके लिए हैं, इन राहोँ से डर लगता है।
No comments:
Post a Comment