रात की चादर में अनगिनत तारे हैं,
कुछ चमकते हैं कुछ गर्दिश के मारे हैं,
सुबह की आहट में एक एक खो जाते हैं,
स्याह फिजा में साथ निभाने फिर आ जाते हैं।
कुछ चमकते हैं कुछ गर्दिश के मारे हैं,
सुबह की आहट में एक एक खो जाते हैं,
स्याह फिजा में साथ निभाने फिर आ जाते हैं।
2 comments:
wah
गर्दिश के मारे भी चमकते हैं भाई..
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